डॉ. राम पुनियानी

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सोमनाथ मंदिर: इतिहास का राजनीतिक औज़ार के रूप में इस्तेमाल

इतिहास हमें यह दिखाने के लिए है कि अतीत में कौन-कौन सी गलतियाँ हुईं, ताकि वे फिर न दोहराई जाएँ। हमें एक ऐसे न्यायपूर्ण समाज की ओर बढ़ना चाहिए जहाँ सभी सम्मान और गरिमा के साथ जीवन जिएँ—एक ऐसा समाज जहाँ हम सभी समान नागरिक अधिकारों का आनंद लें।

क्या भारत की औपनिवेशिक शिक्षा उसकी पारंपरिक ज्ञान-व्यवस्था के विपरीत है?

क्या अंग्रेज़ी ने क्षेत्रीय भाषाओं को दबाया? इतिहास इसके विपरीत संकेत देता है। शिक्षा के विस्तार ने क्षेत्रीय भाषाओं को भी मज़बूत किया। लोकमान्य तिलक ( केसरी, महारत्ता ) और गांधी ( नवजीवन ) ने क्रमशः मराठी और गुजराती में प्रभावशाली अख़बार शुरू किए। रवींद्रनाथ टैगोर (बंगाली) और मुंशी प्रेमचंद (हिंदी) जैसे साहित्यिक…

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